Transportation cost and logistics industry India Overview 1

Transportation cost and logistics industry India Overview

राजा भरत का गौरवशाली भारत जिसका नेतृत्व करनेवालों को आज भी विश्व पूजता है । गौरवशाली इतिहास आज भी बाहरी विश्वविद्यालयो पढ़ाया जाता है । इसी विकास और सम्पन्नता के कारन विगत १०० दशकों में हमपर अनेकानेक हमले हुए ।हमारे मंदिरो को लुटे गए ।साधुओ और शैक्षिक आश्रमों को नस्ट किया गया ।हमारे धर्म ग्रंथो को जलाया गया । लोगो को कर बल छल से धर्म परिवर्तन कराया । समूल संस्कृति के धर्म अर्थ और आस्था को नस्ट किया गया । इस विनाशचक्र से नयी प्रजाति का जन्म हुआ जिसने धन के लालच में या लोभ के वशीभूत अपने समुदाय के विपरीत आक्रांता सभ्यता का वरन किया और अपने ज्ञान को नस्ट कर विज्ञानं की खोज में निकल पड़ा ।

गौरवशाली भारत

महा रक्तपात के बाद भी आज ७ दशकों से कथित स्वतंत्रता के बाद भी हमें विकासशील राष्ट्र की संज्ञा से आना जाता है ।यह हमारे लिए अभिमान है या अभिशाप यह आप निर्धारित करे ।किन्तु कारन अनदेखा न करे इसका प्रमुख कारन है हमारा खंडो में बटा होना। ७ दशकों के बाद भी हम ३७ खंडो में बटे है । और हर खंड का मंत्री स्वयं को अपने प्रान्त का राजा मानने से भी नहीं चुकता ।

गौरवशाली भारत

अब चूँकि चूक हमारी है तो हम देखे इस चूक से हमारे व्यापर परिवहन अर्थव्यवस्था और दैनन्दिनी पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है ।

भारतीय अर्तव्यवस्था :-

भारतीय अर्तव्यवस्था

वैश्विक अर्थव्यवस्था के आकड़ो के हिसाब से भारत औसतन ९० बिलियन व्यापर के साथ नौवे क्रमांक पर सूचीबद्ध है ।जिसमे औसतन ३५ बिलियन निर्यात और ५५ बिलियन आयात करता है । इन आकड़ो के हिसाब से पिछले दशक के परिवेश में इस व्यापर का ५ % परिवहन लागत मूल्य माना जाता था ।

परिवहन व्यापर :-

transport cost
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भारत में जल थल वायु के स्त्रोत से कई व्यापारी साधन है । जिनमे प्रमुखतः मानव रिक्षा, साइकिल रिक्षा, घोड़ागाड़ी, बग्गी ,ऑटो रिक्शा ,कार, टैक्सी, बस, ट्रक, टेम्पो, ट्रेलर, पुलर, ट्रैन ,ट्राम, मालगाड़ी, हवाई जहाज , हेलीकाप्टर ,निजी और कार्गो जेट भी है । जिनसे हम कई बार गौरवान्वित भी होते है किन्तु मानव रिक्शा को देखकर लज्जित नहीं होते ।
भारत में ६५०००० गॉव ६८६ जिले ३७ राज्य है जिनमे से ३५ राज्यों में मार्ग परिवहन संभव है । देश में औसतन ८० लाख व्यापारिक ट्रक है जिनमे से १२ लाख बहु राज्य सेवा में सक्षम है । इसपूरे व्यापर में क्रमशः चालक, मालक, हमाल ,नियंत्रक, वॉचमैन ,ढाबे, ट्रांसपोर्टर, कम्पनिया, चोर, पुलिस, आर .टी .औ. अन्य को मिलकर १० करोड़ से अधिक अपना जीकोपार्जन करते है ।इसके बाद भी इस व्यापर के व्यापारियों की स्थिति दिनोदिन दयनीय होती जा रही है और इनकी आत्महत्या की खबरे सुनाई देती है ।

व्यापर के व्यापारियों की स्थिति दिनोदिन दयनीय

भारत का ४.५ बिलियन का अनुमानित व्यापर विगत ६ दशकों से पारम्परिक रूप से सुचारु चल रहा था । किन्तु सातवे दशक में एक बार फिर भारतीय व्यापर में बहुत बड़े निवेशों के साथ विदेशी व्यापारिक अक्रान्ताओ का हस्तकक्षेप बढ़ा । उन्होंने सरकार को करबद्ध होकर स्वयं हेतु नए और उन्नत विकल्प हेतु विवश किया अग्ग्रेगेटर पालिसी इसका जिवंत उदहारण है ।

transport cost
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व्यापारिक पूंजीवाद में बढ़ोतरी :-

व्यापारिक पूंजीवाद में बढ़ोतरी

विदेशी निवेशकों ने पूंजी के दम पर ऐसे परिवेश का निर्माण किया जिसमे देसी व्यापारी लम्बी उधारी और विदेशी निवेशक तत्कालीन नगदी में व्यापर करे ।

व्यापारिक पूंजीवाद में बढ़ोतरी

विषाक्त नीतियों का व्यापर और दर मूल्यों असर :-

विषाक्त नीतियों का व्यापर और दर मूल्यों असर

इन विषाक्त नीतियों का व्यापर में ऐसा असर हुआ के २०० मिलियन का नगदी व्यापर ८०० मिलियन की उधारी में बदल गया ।वास्तविक प्रतिभाएं नस्ट होती गयी और पूंजीवाद का दानव प्रबल होता गया ।

टेंडरिंग निविदा प्रणाली :-

पाश्चात्य चाटुकारिता के वशीभूत होकर हमने टेंडरिंग निविदा प्रणाली को अपनाया ।जो देश वर्षो में धराशायी होकर कागजो में सिमटकर रह गई अब तो औपचारिकता वश इसका उपयोग होता है कार्यशैली तो पूर्व निर्धारित हो जाती है ।

परिवहन मूल्य :-

परिवहन मूल्य

भारतीय सरकार बस ट्रैन ऑटो रिक्शा और आजकल तो हवाई यात्राओं के किराये तक निर्धारित कर रही है तो मॉल धुलाई व्यापर से सौतेला व्यापर क्यों ?

  • आज मुंबई से चेन्नई ट्रक जाने में ५० हजार किराया मिलता है किन्तु चेन्नई से मुंबई वापसी में २५ हजार भी नहीं मिल पता ।
  • बेल्लारी से मुंम्बई किसी बड़ी कंपनी से १९९० से आज २०२० तक परिवहन मूल्य १००० रूपए टन ही है ।क्या ३० वर्षो में परिवहन व्यापारियों के लिए महंगाई नहीं बढ़ी ।
  • सरकार ट्रांसपोर्टरों से रोड टैक्स, ग्रीनटेक्स, सिटी, सेंट्रल, स्टेट, बॉर्डर, और पूर्वी भारत में तो प्रतिवाहन प्रति राज्य ५०००० गुंडा टैक्स भी ले रही है
  • आधुनिकता के नाम पर हमारे ६ लाख के वाहनों को १८ लाख का कर दिया गया । इतने से मन नहीं भरा तो प्रतिवर्ष रोड टैक्स और बीमा के दामों में मनमाना बढ़ोतरी की जा रही है ।
  • टोल प्रणाली लाने से पहले उद्देश्य था की ५ रूपए प्रति किलोमीटर के भुगतान पर हम अच्छे राज्यमार्ग देंगे जो आपकी गति और देश की प्रगति को बढ़ाएगा और खर्च को घटाएगा । इस चिराग से जो जिन निकला उसने हर ३० किलोमीटर पर हमसे ३५० से ५०० रूपए वसूला ।टोल की सरकारी वेब साइट पर पुणे से सूरत के बिच केवल ४ टोल पंजीकृत है किन्तु वास्तविकता में हर ३० किलोमीटर पर ये राक्षस खड़े मिलेंगे आपको उगाही के लिए बड़े प्रेम से जो भारी उगाही के बाद बाथरूम जैसी छोटी सी सुविधा के लिए भी मुकर जाते है ।
  • इसके बावजूद इन टोल पर धर्मकांटे बिठाये है जिनकी मरम्मत कभी होती ही नहीं और प्रतिगाडी ये १००० रूपए की अनैतिक उगाही बड़े ईमानदारी से दिन रात करते है प्रशासनिक सुरक्षा के साथ ।
  • इसके बाद उन्हें लगा की अब ही कुछ बाकि है तो उन्होंने फास्टटैग लगवा दिए जिससे गाड़ीवालो का समय बचे ।तकनीकी आभाव में यह समय पर काम करते नहीं और यात्रा के दो दिन बाद यात्री के बैंक खाते से टोल राशि कट जाती है और सुनवाई कोई नहीं ।
नयी नीतियों का परिवहन मूल्य पर असर

विगत तीन दशकों से भारतीय निम्न वर्ग ऑटो टैक्सी चला कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते थे सर्कार को यह ठीक नहीं लगा ।हर भारतीय १०० से ३००० रूपए औसतन ऑटो टैक्सी में खर्च करता है । इस व्यापर में अग्ग्रेगेटर लाकर इसे भी विदेशियों को अर्पण कर दिया गया । आज बड़े कॉर्पोरेट हमारे साधन और कर्मचारी प्रयोग कर हमारे व्यापर का २५ से ३० % आराम से हस्तगत कर रहे है और हम इस व्यापारिक विनाश को विकास समझ रहे है ।
अततः सरकारी सारी नीतिया लघुउद्योोगो और विशेष रूप से परिवहन व्यापर के विपरीत है ।

नयी नीतियों का परिवहन मूल्य पर असर

नयी नीतियों का परिवहन मूल्य पर असर

सारांश में नयी नीतियों और बढ़ते पूंजीवाद से भारतीय प्रकल्पो में परिवहन लागत ५ से २५ % तक हो गयी है ।निरादर वश नए चालक इस व्यापर में आना नहीं चाहते ।

वाहन चालकों का आभाव

वाहन चालकों का आभाव

चालकों का आभाव और उनका निम्न वेतन इस व्यापर को समाप्त करते के लिए कारणीभूत है ।विदेशी निवेशक बड़ी पूंजी और परियोजनाओं के दम पर इस व्यापर को हथियाते जा रहे है ।

भारतीय परिवहन व्यापर

भारतीय परिवहन व्यापर

आज भारत में ३० % वाहन अच्छे चालकों और माल के आभाव , २०% लोडिंग और अनलोडिंग समय पर न होने से डिटेंशन का शिकार २०% राज्य सीमाओं या सरकारी अफसरी के शिकार के भय से हमेशा ही नुकसान झेलते हुए खड़े रहते है ।बचे ३० % वाहन लोडिंग के लिए २०० बड़े शहरो या बंदरगाहों पर खड़े है । ६८६ जिलों में से ४५० जिले इस सेवा या इस व्यापर से अछूते रह जाते है जो कदाचित बेरोजगारी का बहुत बड़ा माध्यम भी है ।

भारतीय परिवहन व्यापर

समस्या का निदान

भारतीय परिवहन व्यापर

इस बड़े यक्ष प्रश्न से बचने के लिए हमें भारत के हर जिले को १० बड़े कारखाने देने होंगे । हर व्यक्ति की लघुत्तम आय कम से कम १८००० करनी होगी । शिक्षा ,आरोग्य ,यातायात ,मार्ग ,बिजली ,पानी ,पर दुगने जोर से ईमानदारी पूर्वक अच्छे नतीजों के साथ काम करना होगा । बस और टैक्सी की तरह ट्रको की प्रतिकिलोमीटर किराये सरकार को प्रति वर्ष निर्धारित करने होंगे । महामार्गो पर सुरक्षित पार्किंग बढ़ानी और कबाड़ की दुकानों को हटानी होगी सुरक्षा के दृश्टिकोण से । वाहन चालकों और उनके परिवार की आय और आरोग्य पर विशेष ध्यान देना होगा । अच्छे और मजबूत वाहनों को ही रोड पर उतरने की अनुमति दिलानी होगी । वाहन निर्माताओं को ५ वर्ष निजहित को त्यागकर राष्ट्रहित पर कार्य करना होगा । तेल के दाम हर राज्य में समान और सामान्य करने होंगे । महामार्गो को टोल से मुक्त करना होगा । महामार्गों से अफसरी आतंक को भी हटाना होगा । बड़े उद्योजको को स्वदेशी व्यापर को बढ़ावा देना होगा।

ऐसा नहीं हुआ तो भारतीय व्यापर नस्ट हो जायेंगे और हमारे आपके लिए रामराज्य केवल स्वप्न,भ्रम या छलावे के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होगा .

भारतीय परिवहन व्यापर
भारतीय परिवहन व्यापर

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